Wednesday, September 9, 2020

रंजिश ही सही...

 अहमद फ़राज़:-


बेइंतिहा लोकप्रिय शायर/अपनी रूमानी और विरोधी -कविता के लिए प्रसिद्ध

आयु काल-(1931 - 2008) 

इस्लामाबाद ,पाकिस्तान

 

     रंजिश ही सही 

                  दिल ही दुखाने के लिए आ

     आ फिर से 

                  मुझे छोड़ के जाने के लिए आ




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राजदारों से बचके चलता हूँ

  राजदारों से बचके चलता हूँ गम गुसारों से बचके चलता हूँ  मुझको धोखा दिया सहारों ने  अब सहारों से बचके चलता हूँ