Sunday, September 27, 2020

ਫਰੀਦਾ ਕੋਠੇ ਮੰਡਪ ਮਾੜੀਆਂ..

 ਫਰੀਦਾ 

         ਕੋਠੇ ਮੰਡਪ ਮਾੜੀਆਂ ਐਂਵੇਂ ਨਾ ਲਾਈਏ ਚਿੱਤ

         ਮਿੱਟੀ ਉੱਪਰ ਪਈ ਜਦੋਂ ਕੋਈ ਨਾ ਹੋਸੀ ਮਿੱਤ




Tuesday, September 22, 2020

एक रास्ता हूं मैं...

 

एक रास्ता हूं मैं

                     मुसाफिर भी हूं
सजदे में हूं मैं

                     काफिर भी हूं
बहुत दूर तक है 

                     कहीं कुछ भी नहीं
आगाज़ हूं मैं

                     आखिर भी हूं







Saturday, September 19, 2020

ਬਦਲੇ ਨੇ ਦਿਲਬਰਾਂ ਦੇ..

ਇੰਦਰਜੀਤ ਕਾਜਲ:-

ਇੰਦਰਜੀਤ ਕਾਜਲ (ਪਿੰਡ - ਜੰਡੌਰ, ਤਹਿ-ਦਸੂਹਾ, ਜਿਲ੍ਹਾ - ਹੁਸ਼ਿਆਰਪੁਰ) ਪੰਜਾਬੀ ਕਾਵਿ ਰਚਨਾਵਾਂ ਦੇ ਧਨੀ ਹਨ।

ਉਹਨਾਂ ਦੀਆਂ ਰਚਨਾਵਾਂ ਪੜ੍ਹ ਕੇ ਸਾਨੂੰ ਆਪਣੇ ਜੀਵਨ ਨੂੰ ਸ਼ਿੰਗਾਰਨ ਲਈ ਸੇਧ ਮਿਲਦੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਹੀ ਰਚਨਾ ਚੋਂ ਦੋ ਪੰਕਤੀਆਂ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹਨ:-

ਬਦਲੇ ਨੇ ਦਿਲਬਰਾਂ ਦੇ 

               ਅੰਦਾਜ਼ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ

ਮੌਸਮ ਜਿਵੇਂ ਬਦਲਦਾ 

                ਅੰਦਾਜ਼ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ


 


Monday, September 14, 2020

उम्र भर ग़ालिब....

 मिर्ज़ा ग़ालिब:-


उम्र भर ग़ालिब 

        यही भूल करता रहा 

धूल चेहरे पे थी 

        और आइना साफ करता रहा 





Wednesday, September 9, 2020

रंजिश ही सही...

 अहमद फ़राज़:-


बेइंतिहा लोकप्रिय शायर/अपनी रूमानी और विरोधी -कविता के लिए प्रसिद्ध

आयु काल-(1931 - 2008) 

इस्लामाबाद ,पाकिस्तान

 

     रंजिश ही सही 

                  दिल ही दुखाने के लिए आ

     आ फिर से 

                  मुझे छोड़ के जाने के लिए आ




Sunday, September 6, 2020

बिकती है ना खुशी कहीं...

 शायरी:-


बिकती है ना खुशी कहीं

ना कहीं गम बिकता है 

लोग गलतफहमी में हैं 

कि कहीं मरहम बिकता है 






राजदारों से बचके चलता हूँ

  राजदारों से बचके चलता हूँ गम गुसारों से बचके चलता हूँ  मुझको धोखा दिया सहारों ने  अब सहारों से बचके चलता हूँ