आतिश:-
दिखावे के हैं सब
ये दुनिया के मेले
भरी बज़्म में हम
रहे हैं अकेले
दर्द मुझको ढूंढ लेता है रोज
नए बहाने से
वो हो गया है वाकिफ़ मेरे
हर ठिकाने से
जब से
चेहरे पढ़ने की कला पाई है
तब से
एक मैं हूँ और मेरी तन्हाई है
आँखें पढ़ो और जानो
हमारी रजा क्या है
हर बात लफ़्ज़ों में हो
तो मज़ा क्या है
राजदारों से बचके चलता हूँ गम गुसारों से बचके चलता हूँ मुझको धोखा दिया सहारों ने अब सहारों से बचके चलता हूँ