शबीना अदीब :-
ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फत नई-नई है
अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में
अभी मोहब्बत नई-नई है
राजदारों से बचके चलता हूँ गम गुसारों से बचके चलता हूँ मुझको धोखा दिया सहारों ने अब सहारों से बचके चलता हूँ
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