इस अहद के इन्सां में बफा ढूँढ रहे हैं
हम ज़हर की शीशी में दवा ढूँढ रहे हैं
पहले तो ज़माने में खो दिया कहीं खुद को
आईने में अब अपना पता ढूँढ रहे हैं
राजदारों से बचके चलता हूँ गम गुसारों से बचके चलता हूँ मुझको धोखा दिया सहारों ने अब सहारों से बचके चलता हूँ
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